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घर करती अनुरोध की भाषा। आध्यात्मिक ज्ञान।

घर करती अनुरोध की भाषा। बाण से गहरा वाणी का घाव। घर करती अनुरोध की भाषा। कुछ खास सूत्र जो आज मैं आप सबसे कहना चाहता हूँ सार के रूप में जिसे आप यहां से लेकर के जाना चाहते हैं कि अपने घर में…
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यह संवाहक वह समर्पिता , ऐसे सम्बन्ध बनें पति।

यह संवाहक वह समर्पिता , ऐसे सम्बन्ध बनें पति - पत्नी में।     यह संवाहक वह समर्पिता , ऐसे सम्बन्ध बनें पति - पत्नी में । उरलता भी आसमान को छू लेती है । लता वृक्ष से लिपट कर ही आगे बढ़ सकती है ट…
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कुछ बातें बुजुर्गों के काम की ।

कुछ बातें बुजुर्गों के काम की । बच्चों की भावनाएँ : रखें ख्याल उनका भी।                        कुछ बातें बुजुर्गों के काम की । थोड़ी च…
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माता पिता के गौरव क्या बच्चों का कर्त्तव्य ।

माता - पिता के गौरव की स्थापना : बच्चों का कर्त्तव्य । माता - पिता के गौरव की स्थापना : बच्चों का कर्त्तव्य । तीन का उपकार बहुत दुष्प्रतिकार होता है माता - पिता , गुरु और जीविकादाता | माता…
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होवे घर घर श्रवण सा बेटा ।आध्यात्मिक ज्ञान।

 होवे घर घर श्रवण सा बेटा । रहें कृतज्ञ अपनी जननी के। होवे घर घर श्रवण सा बेटा । हमारे अतीत के इतिहास में एक नर रत्न हुआ है श्रवण कुमार जो केवल भारत में ही हुआ जिसने अपने जीवन पर्यंत में अपनी भरी जवा…
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कर्मबंधन से कैसे छूटें?आध्यात्मिक ज्ञान।

 कर्मबंधन से कैसे छूटें?             स्वरूपतः हम कौन हैं ? कहाँसे आये हैं ? हमारा   गन्तव्य क्या है ? यह संसारका अत्यन्त जटिल प्रश्न है । पूरा विश्व इसका समुचित उत्तर देनेमें बगलें झाँकने लगता ह…
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परिवार की खुशहाली का राज ।

परिवार की खुशहाली का राज । जीवन मूल्यों की शिक्षा मिलती हमें रामायण से। परिवार की खुशहाली का राज   विश्व परिवार नहीं विश्व बाजार भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम् की संस्कृति है । हम उस संस…
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गुण ग्रहण का भाव रहे नित।वर्तमान ।

गुण ग्रहण का भाव रहे नित।वर्तमान " की चाभी “ भविष्य " का ताला ।   गुण का भाव नीत  अच्छी तरह से वर्गीकृत है। प्रोबेशन की गुणवत्ता आपकी दृष्टि पर विशेष। अवैगुनी गुण विशेष रूप से सक्षम होने पर भी दो…
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बुराई में भी अच्छाई से सूत्र हैं ।

 सन्तोषी सदा सुखी। बुराई में भी अच्छाई से सूत्र हैं । सन्तोषी सदा सुखी। दूसरी बात है- जो है जितना है उतने में संतुष्ट रहिये । आज मनुष्य के पास जितना है , उसमें उसे चैन नहीं है । पर्याप्त होने के …
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अपना दुख है कितना बौना ? आध्यात्मिक ज्ञान।

पर की पीड़ा हिमालयी है अपना दुख है कितना बौना ? दो प्रकार का सुख होता है एक अभिप्राय का सुख , जबकि दूसरा अनुभूति का सुख । अभिप्राय का सुख मनुष्य के स्टेटस पर अवलंबित होता है और अनुभूति का सुख मनुष…
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